माँ वैष्णो देवी मंदिर की कहानी और महिमा

कहानी वैष्णो देवी के मंदिर बनने की | श्रीधर पंडित द्वारा माँ की खोज  की कथा Story Behind Vaishno Devi Temple in Hindi. 

माता रानी का भवन जम्मू में कतरा से 13 किमी की दुरी पर त्रिकुटा पर्वत के बीच स्तिथ है . यह लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर है .


वैष्णो देवी मंदिर की महिमा

इस मंदिर को लेकर भक्तो में एक बात प्रसिद्ध है की माँ वैष्णो का जिस भक्त को बुलावा जायेगा वो माँ वैष्णो के इस धाम में सारे कारज छोड़कर दौड़ा दौड़ा आएगा | चलो बुलावा आया है , माता ने बुलाया है | इस जगह अपार शांति का अहसास होता है | हर साल लाखो भक्त माँ के दर्शानार्थ इस जगह आते है | गुफा के अंदर कोई मूर्तियों नहीं हैं। दर्शन साल भर चौबीसों घंटे खुले रहते है। वर्ष 1986 के बाद से, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीर्थ का प्रबंधन और यात्रा के यात्रियों के लिए एक आरामदायक और संतोषजनक अनुभव बनाने के उद्देश्य से विकासात्मक गतिविधियों का कार्य कर रहा है। । बोर्ड यात्री सुविधाओं के विभिन्न प्रकार के क्षेत्र में सुधार के लिए बाहर carying में प्राप्त प्रसाद और दान पुनर्निवेश करने के लिए जारी है। बोर्ड यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार के क्षेत्र में सुधार के लिए कोशिश कर रहा है यह आये गए दान से किया जाता है।

माता वैष्णो देवी की महिमा


यह जगह स्वर्ग से भी सुंदर है और यहा की दुनिया सभी से अलग है . 

वैष्णो देवी मंदिर का इतिहास और कहानी 

यह माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण करीबन ७०० साल पहले पंडित श्रीधर द्वारा हुआ था, जो एक ब्राह्मण पुजारी थे जिन्हे माँ के प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति थी जबकि वह गरीब थे। उनका सपना था की वह एक दिन भंडारा ( व्यक्तियों के समूह के लिए भोजन की आपूर्ति ) करे, माँ वैष्णो देवी को समर्प्रित भंडारे के लिए एक शुभ दिन तय किया गया और श्रीधर ने आस पास के सभी गाँव वालो को प्रसाद ग्रहण करने का न्योता दिया |

 भंडारे वाले दिन पुनः श्रीधर अनुरोध करते हुए सभी के घर बारी बारी गया ताकि उसे खाना बनाने की की सामग्री मिले और वह खाना बना कर मेहमानो को भंडारे वाले दिन खिला सके। सभी को छोड़कर थोड़ो ने उसकी मदद की पर वह काफी नहीं था क्यों की मेहमान ज्यादा थे। जैसे जैसे भंडार का दिन नजदीक और नजदीक आता जा रहा था , 


 

पंडित श्रीधर की मुसीबतें भी बढ़ती जा रही थी। वह सोच रहा था इतने कम सामान के साथ भंडारा कैसे होगा। 

भंडारे के एक दिन पहले श्रीधर एक पल के लिए भी सो नहीं पा रहा था यह सोचकर की वह मेहमानो को भोजन कैसे करा पायेगा ,इतनी कम सामग्री में और इतनी कम जगह में। वह सुबह तक उसकी समस्याओं से घिरा हुआ था और बस उसे अब देवी माँ से ही आस थी | वह अपनी झोपड़ी के बाहर पूजा के लिए बैठ गया ,दोपहर तक मेहमान आना शुरू हो गए थे श्रीधर को पूजा करते देख वे जहा जगह दिखी वहा बैठ गए। वे श्रीधर की छोटी से कुटिया में आसानी से बैठ गए और अभी भी काफी जगह बाकी थी।

माँ वैष्णो देवी का छोटी बालिका के रूप में आना

श्रीधर ने अपनी आंखें खोली और सोचा की इन सभी को भोजन कैसे करायेगा , तब उसने एक छोटी लड़की को उसके झोपडी से बाहर आते हुए देखा जिसका नाम वैष्णवी था भगवान की कृपा से आई थी , वह सभी को स्वादिस्ट खाना परोस रही थी , भंडारा बहुत अच्छी तरह से हो गया था जबकि भैरोनाथ के आदमी ने कई मुसीबतें पैदा की थी जो गोरकनाथ के गुरु थे जिनको भी भंडारे में बुलाया गया था। 

भंडारे के बाद , श्रीधर उस छोटी लड़ी वैष्णवी के बारे में जानने के लिए उत्सुक था , पर वैष्णवी गायब हो गयी थी , और उसके बाद किसी को नहीं दिखी। बहुत दिनों के बाद श्रीधर को उस छोटी लड़की का सपना आया जिसने उससे कहा की वह माँ वैष्णो देवी थी । 

माता रानी के रूप में आई लड़की ने उसे सनसनी गुफा के बारे बताया और चार बेटों के वरदान के साथ उसे आशीर्वाद दिया। श्रीधर एक बार फिर खुश हो गया था और माँ की गुफा की तलाश में निकल गया था , जब उससे वह गुफा मिली तो उसने तय किया की वह अपना सारा जीवन माँ की सेवा करेगा। जल्द ही पवित्र गुफा भक्तो के बीच  प्रसिद्ध हो गयी और भक्त झुण्ड में माँ वैष्णो के दर्शन करने आने लगे .

समय समय पर माता वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा को आसान से आसान करने के लिए नए मार्ग , मार्गो का सुधारिकरण का कार्य वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के द्वारा किया जाता है . 

आज के समय में यह कठिन यात्रा बहुत ही सरल हो गयी है .  

ऊपर है भैरो नाथ मंदिर 

ऐसी मान्यता है कि जो भक्त माँ वैष्णो देवी की पवित्र गुफा के दर्शन करने आएगा , उसके दर्शन तभी पूर्ण होंगे जब वे ऊपर भैरव घाटी में जाकर भैरो नाथ के दर्शन भी करेगा . भैरो नाथ के तामसिक तांत्रिक था जिसका वध माँ वैष्णो ने किया था पर मरते मरते उसने माँ से वरदान पा लिए कि वैष्णो देवी के साथ उसका नाम भी अमर हो जायेगा .

bhairav nath mandir vaishno devi


वैष्णो देवी मंदिर से भैरव नाथ की थोड़ी कठिन और सीधी चढ़ाई है जी सीढियों के माध्यम से की जाती है .  अब यहा रोप वे की सुविधा भी है जिससे आप कुछ रुपए देकर आ जा सकते है . 

पढ़े :- माँ वैष्णो देवी यात्रा से जुड़ी जरुरी बातें जो आएगी आपके काम 

वैष्णो देवी मंदिर के पास कौनसी जगहे प्रसिद्ध है ? 

वैष्णो देवी मंदिर त्रिकुटा पहाड़ी के बीच में एक गुफा में बना हुआ है जिसे अर्धकुमारी कहते है . यहा तीन पिंडियो का मिश्र रूप वैष्णो देवी कहलाता है . यह तीन पिंडियाँ दाए से बाए तक क्रम में काली , सरस्वती और लक्ष्मी की है 

बाण गंगा :- यह एक छोटी सी नदी है जिसका नाम है बाण गंगा . कहते है माँ वैष्णो ने इसे अपने तीर को जब धरती पर छोड़ा तो यह गंगा प्रकट होकर बहने लग गयी थी . श्रद्दालु इस पवित्र नदी में स्नान करके आगे माता रानी के दर्शन की यात्रा शुरू करते है . 

चरण पादुका मंदिर :- इस जगह माँ वैष्णो के चरण चिन्ह है जब वे भागते भागते पीछे मुड़कर भैरवो नाथ को देखती है तब यह चरण चिन्ह धरती पर उभर गये थे . अब इसके चारो तरफ एक भव्य मंदिर बना दिया गया है . 

यह भी यात्रा के बीच में आता है . 

भैरो  मंदिर :- माता रानी के मुख्य मंदिर से 2 किमी ऊपर भी भैरो मंदिर है . इस मंदिर में आकर दर्शन करने के बाद ही आपकी वैष्णो देवी की यात्रा पूर्ण होती है . यहा आप पैदल , रोपवे या फिर घोड़े खच्चर से जा सकते है . 





माता वैष्णो देवी और मंदिर से जुड़े मुख्य प्रश्न उत्तर 

प्रश्न 1 : - कौन है माता वैष्णो देवी ? 

उत्तर :- माता वैष्णो देवी के छोटी कन्या का रूप था जिसने तम अधर्म और अज्ञान में चूर भैरो नाथ तांत्रिक का वध किया था और फिर अंत में अपने रूप को तीन पिंडियो में बदल लिया जो लक्ष्मी , सरस्वती और काली का रूप है .  

प्रश्न 2 : -  वैष्णो देवी मंदिर के कार्यभार को कौन संभालता है ? 

उत्तर  :- माता वैष्णो देवी दर्शनार्थ आने वाले भक्तो की सुख सुविधा का ध्यान रखने का कार्य वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड संस्थान करती है . यह मार्गो का नवीनीकरण , दर्शन पर्ची , रुकने खाने पीने की व्यवस्था किफायती रेट में करवाती है . 

प्रश्न 3 : - वैष्णो देवी का रूप क्या है ? 

उत्तर :- वैष्णो देवी के छोटी कन्या का रूप है फिर ये खुद को तीन पिंडियो के रूप में बदल दी जो वैष्णो धाम में तीन पिंडियो के रूप में जानी जाती है . 

प्रश्न 4 : - RFID Card क्या है और यह दर्शन के लिए बनवाना क्यों जरुरी है  ? 

उत्तर :- जो भी भक्त वैष्णो देवी की यात्रा करने कटरा आते है उन्हें यह RFID Card बनवाना ही होती है . इसके बिना आप दर्शन नही कर पाएंगे . RFID एक तरह से आपका पहचान कार्ड ही है जिसमे जानकारी आपके किसी आधार या पेन कार्ड से ली जाती है . इस कार्ड का फायदा यह होता है कि जिस व्यक्ति के पास यह होता है उसे ट्रैक किया जा सकता है . इससे यदि कोई व्यक्ति खो जाए तो उसका पता लगाया जा सकता है . 

RFID Card क्या है ?


सारांश 

  1. तो मित्रो वैष्णो देवी माता की पौराणिक कहानी क्या है . यह वैष्णो देवी का मंदिर कैसे स्थापित हुआ और श्रीधर और भैरो नाथ तांत्रिक कौन था जो वैष्णो देवी की कथा के मुख्य पात्र थे . आशा करता हूँ कि आपको यह पोस्ट ज्ञानवर्धक और रोचक लगी होगी . 

 वैष्णो देवी का रूप तीन पिंडियो में विराजित है

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