मन में बसा कर तेरी मूर्ति , उतारू मैं गिरधर तेरी आरती भजन लिरिक्स 

Man Me Basa Kare Teri Murti , Hindi Bhajan Aniruddhacharya Lyrics बुरा मनुष्य का जीवन बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है . कुछ ऐसे प्यारे भजन है जिसके बोल किसी आरती से कम नही है , ऐसे भजनों से हम परमात्मा से सुखद जीवन की कामना करते है , बुरे को मिटाने की और अच्छे को लाने की बात कहते है . ऐसा ही भजन है मन में बसा कर तेरी मूर्ति , उतारू मैं गिरधर तेरी आरती 

मन में बसा कर तेरी मूर्ति , उतारू में गिरधर तेरी आरती

हाजरी भरो तो घर जावां बंशी वाला जी हिंदी लिरिक्स

मन में बसाकर तेरी मूर्ति,

उतारू में गिरधर तेरी आरती॥

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करुणा करो कष्ट हरो ज्ञान दो भगवन

भव में फसी नाव मेरी तार दो भगवन

दर्द की दवा तुम्हरे पास है...2

जिंदगी दया की है भीख मांगती

मन में बसाकर तेरी मूर्ति

उतारू में गिरधर तेरी आरती॥

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मांगु तुझसे क्या में यही सोचु भगवन

जिंदगी जब तेरे नाम करदी अर्पण

 

सब कुछ तेरा कुछ नहीं मेरा

चिंता है तुझको प्रभु संसार की

मन में बसाकर तेरी मूर्ति

उतारू में गिरधर तेरी आरती॥



वेद तेरी महिमा गाये संत करे ध्यान

नारद गुणगान करे छेड़े वीणा तान

भक्त तेरे द्वार करते है पुकार

दास व्यास तेरी गाये आरती

मन में बसाकर तेरी मूर्ति

उतारू में गिरधर तेरी आरती॥


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