कुंभ में कल्पवास किसे कहते है जाने नियम और फायदे 

कल्पवास का अर्थ होता है प्रयाग संगम के तट पर निवास कर धार्मिक कर्म करना | इन कर्मो में तीर्थ स्नान , वेद , पुराणों का अध्ययन , हवन , मंत्र जप और दान मुख्य है | यह कल्पवास दुनिया से परे सिर्फ ईश्वर कि भक्ति को समर्प्रित होता है |अर्थात ऐसा वास जिसमे सिर्फ अध्यात्म ,अध्यात्म और अध्यात्म ही हो . 

प्रयाग में एक माह का कल्पवास


कल्पवास का अर्थ क्या है 

कल्पवास अल्पवास की तरह ही है जिसका अर्थ है तीनो नदियों के संगम पर बने महातीर्थ प्रयाग संगम के नजदीक 1 माह तक रुकना और इस एक माह के समय में पूर्ण रूप से ईश्वर प्राप्ति के कर्म करना जैसे तीन बार गंगा स्नान , वेद पुराणों का अध्ययन , लोगो से धार्मिक बाते करना , पूजा दान आदि . घर परिवार संसार सभी को भुला कर कल्पवास बिताना चाहिए . 

जीवन के अंतिम पड़ाव में सभी सांसारिक मोह माया का त्याग कर अपने जीवन को अध्यात्म की रोशनी देकर तम रज अवगुणों को दूर करना ही कल्पवास है . 

कल्पवास कब से कब तक होता है 

इसका पूण्य व्यक्ति के मानसिक और दैहिक शांति के लिए सबसे उत्तम माना गया है । कल्पवास पौष माह के 11वें दिन से माघ माह के 12वें दिन तक रहता है। कई लोग पौष पूर्णिमा से लेकर माघ पूर्णिमा तक कल्पवास रखते है .  कुछ श्रद्दालुओ के लिए यह माघ पूर्णिमा तक रहता है । यहा कल्पवास करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढती है |

कल्पवास में क्या करना चाहिए ,जाने नियम

कल्पवास का मुख्य अर्थ तीर्थ स्नान पर कुछ दिनों तक रुककर अपना सम्पूर्ण समय ईश्वर की महिमा का पान करने में है | हमारे प्राचीन महान ऋषि मुनियों ने इसकी शुरुआत संगम के तट पर की थी | सुबह नित्य कर्म से स्वतंत्र होकर सूर्य देवता को अर्ध्य देकर स्नान करे | फिर मंत्र जप या हवन करके ईश्वर को अग्नि द्वारा भोग अर्पित करे | धार्मिक कथाओ में बैठे और जरुरतमंदो को वस्त्र और अन्न का दान करे |

कल्पवास में दिन में तीन बार गंगा स्नान करना चाहिए | सूर्योदय पर , दोपहर में और सूर्यास्त के समय | सात्विक भोजन करना और जमीन पर सोना अनिवार्य है |

ध्यान रखे जो श्रद्दालु इस कल्पवास रूपी व्रत को धारण करते है उन्हें फिर यह लगातार 12 साल तक करना होता है  अर्थात 12 साल तक हर बार 1 महीने के लिए आपको माघी व्रत में शामिल होना ही पड़ेगा . 

कल्पवास का महत्व 

पुराणों में कल्पवास का अत्यंत महत्व बताया गया है . एक परिवार से जुड़ा व्यक्ति जब परिवार को छोड़कर एक महीने के लिए प्रयागराज में रहकर अपनी पूरी दिनचर्या प्रभु भक्ति में समर्प्रित कर देता है तो इस व्रत का पूण्य 100 साल दाना पानी छोड़े हुए तप के बराबर होती है . ठण्ड के समय में गंगा , यमुना सरस्वती के किनारे एक माह रुकना और एक समय खाना और जमीन पर सोना और सभी सुखो का त्याग करना एक बहुत बड़ी तपस्या है . 

इस एक माह के समय में बड़े स्नान के दिन होते है पौष पूर्णिमा , मकर संक्रांति , मौनी अमावस्या , माघ पूर्णिमा और शिवरात्रि . 

प्रयाग में रुकने की व्यवस्था


यह तो साब पहला पड़ाव है फिर आपको ऐसे ही 12 पडाव 12 साल तक देखने पड़ेंगे . 

कल्पवास में कहाँ रुकते है 

कल्पवास के एक महीने के समय आप अपना भी एक टेंट संगम तट पर बुक करा सकते है . यही बाकी लोगो के टेंटो के साथ आप भी टेंट में रुक सकते है .

कल्पवास से जुड़े प्रश्न उत्तर 

प्रश्न 1 कल्पवास का दूसरा नाम क्या है ?

उत्तर 1 कल्पवास का दूसरा नाम माघ मेला है जो प्रयागराज में एक माह के लिए लगता है . इसे माघी व्रत भी कहते है .  इसे कुछ लोग मिनी कुम्भ भी कहते है . 

प्रश्न 2 कल्पवास में कितने दिन रुकना होता है 

उत्तर 2 कल्पवास का संकल्प लेने वाले को एक साल में एक माह और ऐसे 12 साल में 12 माह रुकना होता है . 

प्रश्न 2 कल्पवास में भोजन कैसे करे ?

उत्तर 2 कल्पवास के समय आपको बहुत से बड़े संतो के पांडाल यही दिख जायेंगे जिनके श्रीमुख से आप पुरानो की कथा सुन सकते है और उनके द्वारा ही भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जाती है . 

 

सारांश 

  1. तीर्थो के महातीर्थ प्रयागराज में एक माह का छोटा कुम्भ मेला जिसे कुम्भ कल्पवास भी कहते है . संगम प्रयाग में कल्पवास क्या होता है और कैसे इसमे रहा जाता है और इसका क्या महत्व और नियम है .  आशा करता हूँ आपको यह पोस्ट जरुर पसंद आई होगी 

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