मार्गशीर्ष माह का महत्व और इसमे आने वाले पर्व और त्योहार 

कार्तिक मास के बाद जो महिना आता है उसे मार्गशीर्ष के नाम से जाना जाता है . यह नवम्बर - दिसम्बर के अन्दर आता है और सर्दी की शुरुआत हो चुकी होती है . हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से नवा महिना है . इसके अन्य नाम अग्रहायण या अगहन का महीना भी है .

मार्गशीर्ष माह का महत्व


यह महिना भगवान श्री कृष्ण के रूप का है अत: इस माह में कृष्णा की पूजा करने का फल अत्यंत प्राप्त होता है | साथ ही पवित्र नदियों में स्नान दान का भी इस महीने में अत्यंत महत्व है | गीता में स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है कि मासानां मार्गशीर्षोऽयम् यानी सभी महीनों में मार्गशीर्ष महीना मेरा ही स्वरूप है।

कृष्ण कहते है कि जो भी मेरे भक्त है उन्हें मार्गशीर्ष माह का व्रत जरुर करना चाहिए. उस व्यक्ति को हर दिन मार्गशीर्ष माह में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए . 


अब चलिए आपको बताते है कि मार्गशीर्ष माह में कौनसे पर्व और त्योहार आते है |

कैसे पड़ा इस महीने का मार्गशीर्ष नाम ?

ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र बताए गए हैं। जिसमे से एक है मृगशिरा नक्षत्र । इस महीने आने वाली पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है। इसी वजह से इस मास को मार्गशीर्ष मास कहा गया है।

मार्गशीर्ष माह कब से शुरू हो रहा है 2023 में 

साल 2023 में मार्गशीर्ष महिना  28  नवम्बर से शुरू होगा जो 26 दिसंबर तक रहेगा |

मार्गशीर्ष माह क्यों है सबसे बड़ा महिना 

कहते है कि हिन्दू धर्म में बताये गये चार युगों में से पहला युग सतयुग की शुरुआत इसी माह से हुई थी . इसके अलावा ऋषि कश्यप ने इसी माह में कश्मीर की स्थापना भी भारत में की थी . अत: इस माह को तप , दान , धर्म और आराधना का महिना माना जाता है . 

इस माह में विशेष रूप से कृष्ण की पूजा की जाती है और उनकी पूजा में तुलसी जी और आंवले की माला का जरुर प्रयोग करना चाहिए , सर पर गोपीचंदन का तिलक लगाना चाहिए और ॐ नमो नारायणा मंत्र का बारम्बार जप करना चाहिए .  

मार्गशीर्ष माह में आने वाले व्रत त्योहार और पर्व

काल भैरव अष्टमी : – काशी के कोतवाल और शिव के रूद्र रूप श्री काल भैरव का मुख्य पर्व कालाष्टमी अगहन मास की कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है | यह इस साल मंगलवार, 5 दिसम्बर  को पड़ेगी |

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी : – उत्पन्ना एकादशी 8 दिसम्बर को है जिसमे विष्णु की पूजा करने का विधान है |

मार्गशीर्ष अमावस्या : –12 दिसम्बर को अगहन मास की अमावस्या है जिसमे पितरो के नाम से तर्पण , दान पुण्य करने से पितरो को शांति प्राप्त होती है |

विवाह पंचमी : श्री राम और जानकी का विवाह जिस मास और तिथि को हुआ वह मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी का दिन था | इसे विवाह पंचमी के नाम से नही जाना जाता है | यह 17 दिसंबर को आ रही है |

मोक्षदा एकादशी :- 22 दिसम्बर को मार्गशीर्ष शुक्ल मोक्षदा एकादशी है जिसमे नियम पूर्वक व्रत और विष्णु की पूजा आराधना से मोक्ष की प्राप्ति होती है | इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है जिस गीता को ज्ञान की गंगा कहा जाता है और जिसके श्रोता अर्जुन और वक्ता श्री कृष्ण थे . 

दत्तात्रेय जयंती : – 26 दिसंबर को मंगसर माह की पूर्णिमा है भगवान दत्तात्रेय की कृपा प्राप्ति का सबसे बड़ा दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन माना जाता है |

सारांश 

  1. हिन्दू पंचांग का नवा माह मार्गशीर्ष माह के नाम से जाना जाता है , इस महीने का हिन्दू धर्म में क्या महत्व और कृष्ण भगवान ने क्यों इसे सबसे बड़ा माह कहा है , आये जानते है . साथ ही जानेंगे कि मार्गशीर्ष महीने में कौनसे पर्व , व्रत और त्योहार आ रहे है .   आशा करता हूँ आपको यह पोस्ट जरुर पसंद आई होगी. 

Post a Comment

Previous Post Next Post