तिल और गुड़ ही क्यों खाते हैं और क्यों उड़ाते है पतंग मकर संक्रांति पर

हिन्दू धर्म में साल के पहले त्यौहार मकर संक्रांति का महत्व दान और पवित्र नदियों में स्नान के रूप में अत्यंत है । इस त्योहार पर खासतौर से तिल-गुड़ से बनी मिठाई खाने और पतंग उड़ाने की परंपरा है। इन परंपराओं के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक तत्व छिपे हुए हैं :- आइये जानते है वे क्या बाते है जो इस पर्व के लिए परम्पराए बन चुकी है |

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़


क्यों उड़ाते हैं इस दिन पतंग –

मकर संक्रांति पतंग उड़ाने का भी त्योहार है । पर धर्म के किसी शास्त्र में यह नही लिखा गया है आप इस दिन पतंग उडाये | पतंगबाजी से छोटे बच्चो और पक्षियों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है | धारधार मांझे कई जीवो के प्राण ले लेते है | फिर किसने शुरू की यह परम्परा ?

मकर संक्राति पर सूर्य उत्तरायण हो जाता है | इस दिन भगवान सूर्य की किरणों को शरीर पर लेना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है | यह किरणे त्वचा के रूखेपन को दूर और शरीर से कफ दूर करती है | आप छत पर आकर सूर्य की किरणों से औषधि रूपी गरमाहट की प्राप्ति करे | पर पतंग उड़ाकर जीव हत्या ना करे |

क्यों खाए जाते है तिल-गुड़ के व्यंजन

मकर संक्रांति पर विशेष रूप से तिल-गुड़ से बनी चीजे खाने की परंपरा है। तिल और गुड़ के स्वादिष्ट लड्डू बनाए जाते हैं और महिलाये इन्हे बांटती भी है । तिल-गुड़ से बनने वाली गजक भी इस मौसम में लोगो को खूब भाती है | इस मिठाई को खाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है | हम सभी जानते है कीमकर संक्रांति सर्दी का त्योहार है | इस समय हमारे शरीर को गर्म चीजो की जरुरत होती है | गुड़ की तासीर भी गर्म तो तिल में तेल भरा होता है | अत: इन दोनों के मिश्रण से बनने वाली मिठाई शरीर को गर्मी देने वाली होती है जो सर्दी में सबसे उत्तम है |

यही कारण है की मकर संक्रांति पर मुख्य मिठाई तिल और गुड़ से बनाई जाती है |

एक धार्मिक कारण यह भी है की तिल को दान करने वाली चीजो में एक मुख्य स्थान दिया गया है | तिल से लड्डू बनाये जाते है जो दान करने में भी काम आते है |

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सारांश 

  1. मकर संक्रांति के दिनों में क्यों तिल गुड़ , रेवड़ी और गजक खाई जाती है .   आशा करता हूँ आपको यह पोस्ट जरुर पसंद आई होगी. 

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