रामेश्वरम् धाम जो एक दक्षिण का एक धाम 

Rameshwarm Dhaam . रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है जिसे आदि शंकराचार्य महाराज ने इसे दक्षिण दिशा का धाम घोषित किया । यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का एक स्थान है |

Rameshwarm Dhaam importance


भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है।

भौगोलिक स्तिथी :

रामेश्वरम एक दीप है जो चारो तरफ से हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है | पहले यह धरती से जुड़ा हुआ था पर सागर का जल स्तर बढ़ने से यह दीप बन गया | यही भगवान राम ने लंका पर जाने के लिए पत्थरो का पुल बनाया था जो बाद में विभीषण के अनुरोध पर तोड़ दिया गया | पर आज भी इसके 48 किमी का सेतु समुन्द्र में दिखाई देता है |

Rameshwar Dham Mandir
Photo : Wikipedia


दक्षिण में कन्याकुमारी नामक प्रसिद्ध तीर्थ है

विश्व का सबसे लंबा गलियारा :

रामेश्वरम का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है। यह उत्तर-दक्षिण में 197 मी. एवं पूर्व-पश्चिम 133 मी. है। इसके परकोटे की चौड़ाई 6 मी. तथ ऊंचाई 9 मी. है। मंदिर के प्रवेशद्वार का गोपुरम 38.4 मी. ऊंचा है। यह मंदिर लगभग 6 हेक्टेयर में बना हुआ है।

Rameshwar Galiyara


मंदिर में विशालाक्षी जी के गर्भ-गृह के निकट ही नौ ज्योतिर्लिंग हैं, जो लंकापति विभीषण द्वारा स्थापित बताए जाते हैं।

स्थापत्य कला का उदाहरण

आकर्षक शहर चेन्नई से तक़रीबन 592 किलोमीटर की दूरी पर है।

काला पत्थर : रामनाथपुरम् के राजभवन में एक बड़ा काला पत्थर रखा हुआ है जो भगवान श्री राम ने राज्याभिषेक पर केवटराज को भेट किया था |


रामनाथ स्वामी मंदिर शानदार वास्तुकला और कलात्मक गलियारा के लिए प्रसिद्ध है | यह पर्यटकों को अपनी भव्यता और सुन्दरता के कारण आकर्षित करता है | 12 सदी में बना यह मंदिर देश के वस्तुकलाओ में अपना अलग ही मुकाम बनाये हुए है |

बाईस कुण्ड रामनाथ मंदिर में बने हुए है पर वर्तमान में 2 कुंड सुख चुके है | पहले यह 24 थे | इनमे स्नान करना पाप नास करने तुल्य है |

 

राम के शिव है रामेश्वरम में

कोदंडाराम स्वामी मंदिर वो जगह है जहा भगवान श्री राम ने विभीषण से भेट की थी | यह धनुष्कोटि से लगभग 8 किमी दूर है।

विल्लीरणि तीर्थ रामेश्वरम के तीर्थ स्थलों में से एक है।

कोरल रीफ धार्मिक जगह तो नही पर प्राकृतिक सौंदर्य की एक मिशाल है | यहा दूर दूर तक सुनहरी रेत और उनपे ऊँचे ऊँचे नारियल के पेड़ इसकी खूबसूरती को बयान करते है |

अग्नि तीर्थम में शांति से परिपूर्ण जल भरा हुआ है जो अपार शांति का अहसास भक्तो को कराता है | यहा घंटो भक्त बैठे रहते है और जल को देखकर शांति का आनंद लेते है |

सेतु माधव भगवान शिव का मंदिर है साथ ही साथ अन्य देवी देवताओ की मुर्तिया भी इसमे शोभायमान है |

धनुषकोटि रामेश्वरम से 18 किमी की दूरी पर एक दर्शनीय स्थल है जहा भगवान श्री राम माता सीता लखन और हनुमानजी की मुर्तिया विराजमान है | इसे दक्षिण की अंतिम सड़क सीमा भी कहा जाता है . 

तिरुपलानी मंदिर बहुत ही सुन्दर चित्रकारी और नक्काशी से बना हुआ अपने आप में प्राकृतिक सुंदरता को समेटे हुए है | अत्यंत शांति यहा भक्तो को प्राप्त होती है और भारत की गौरवशाली कला का यह वर्णन करता है |

गंधाधन परवतम यहा का सबसे ऊँचा स्थल है जहा से समुन्द्र दीप का दूर दूर तक अनुपम नजारा देखा जा सकता है | यह रामेश्वरम मंदिर से लगभग 4 किमी की दुरी पर है |

सीता कुण्ड पाप नाशक है और यहा के कुंडो में सर्वसिद्ध है | कहा जाता है की इस कुंड में स्नान करने से व्यक्ति के पाप मिट जाते है |


आदि सेतु
को लेकर यह मान्यता है की भगवान श्री राम और वानर सेना ने इसी स्थान से सेतु बांधना शुरू किया था | इसका दूसरा नाम दर्भशयनम् है |

कैसे जाये रामेश्वरम् :

रेल मार्ग द्वारा रामेश्वरम जाने वाली सभी रेल सुविधाओं की जानकारी और रेल गाड़ियों का विवरण लेने के लिए क्लिक करें रामेश्वरम चेन्नई,कोयम्बटूर,तरुचि और तंजावुर शहरों से सीधा जुड़ा हुआ है। इन नगरों से रेल मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। कुछ रेल गाड़ियां इस तरह हैं- कोयम्बटूर से रामेश्वरम के लिए-6115 कोयम्बटूर-रामेश्वरम एक्सप्रेस, चेन्नई से रामेश्वरम के लिए- 6701 रामेश्वरम सेतु एक्सप्रेस।

कैसे जाए रामेश्वरम


सड़क मार्ग द्वारा दक्षिण के सभी बड़े शहरों से यहाँ आने के लिए बसें उपलब्ध हैं। अगर आप रामेश्वरम सड़क मार्ग दवारा आना चाहते हैं 


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